हुमायूं का मकबरा व अन्य मकबरा ( Humayu Tomb and other Tomb)

दुनिया का सातवां अजूबा जो भारत का ताजमहल है को दिल्ली के हुमायूं मकबरे के तर्ज पर ही बनाया गया है शाहजहां ने ताजमहल को बिल्कुल हुमायूं के मकबरे के जैसा ही आकृति में बनाया गया है और भारत का पहला उद्यान वाला मकबरा, तो आइए चलिए जानते हैं हूमायू मकबरे का इतिहास और वहां की कुछ ऐतिहासिक स्थल :-




हुमायू के मकबरे का इतिहास

 यह कहां पर है

दिल्ली का हुमायूँ  का मकबरा के नाम से प्रसिद्ध यह ऐतिहासिक स्थल भारत की राजधानी दिल्ली के मथुरा रोड पर हजरत निजामुद्दीन औलिया  की दरगाह  के   विपरीत स्थित है

इस मकबरे के निर्माण का कारण

20 जनवरी 1556 को हुमायूँ  की मृत्यु के बाद उसके शरीर को शुरू में दिल्ली के पुराने किले में दफनाया गया था लेकिन हेम विक्रमादित्य के हमले से बचने के कारण व  हुमायू के शरीर की रक्षा करने के कारण हुमायू के  शरीर को  इस किले के अंदर दफनाया गया इसके बाद जब 1556 में तत्कालीन अकबर को राजगद्दी सौंपी गई तब उसने इस किले के निर्माण आरंभ किया|

इस मुख्य इमारत में मुगल सम्राट हुमायूं के मकबरे के साथ कई अन्य राजसी लोगों की भी कब्रे भी है जैसे बेगम हमीदा बानो बेगम तथा  बाद के सम्राट शाहजहां के जेष्ठ पुत्र दारा शिकोह और कई उत्तराधिकारी मुगल सम्राट जहांदर शाह, फ्ररुख्शियार, रफी उल दर्जत, रफी उद-दौलत और आलमगीर द्वितीय आदि की कब्रे स्थित है।

किसने इसका निर्माण करवाया

जैसा कि अभी बताया गया है कि इस किले का निर्माण हुमायूँ  के लिए किया गया था वह इस किले का निर्माण हुमायूँ  की बेगम हमीदा बेगम ने करवाया था इसको ताजमहल से पूर्व बनाया गया था ताजमहल इसी के तर्ज पर बनाया गया है।


लाल बलुआ पत्थर पर लेख

लाल बलुआ पत्थर मे लेख

हुमायू की मृत्यु के 9 वर्षों के बाद 1565 में इस मकबरे का कार्य पूर्ण रूप से शुरू किया गया था जोकि सन् 1572 में पूरा किया गया जिसको बनाने में 7 वर्ष लग गए। इस मकबरे को बनाने की लागत 15 लाख रुपये की आई थी। इस मकबरे के वास्तुकार सैयद मुबारक एवं मिराक घियाथुद्दीन एवं सैयद के पिता मिराक घुइयाथुद्दीन थे। हमीदा बेगम  ने अफगानिस्तान से बुलाकर हाजी बेगम( हमीदा बानो बेगम) द्वारा नियुक्त किया गया था।

इस किले की आकृति और आकार

हुमायूं के मकबरे में जाने के मुख्य प्रवेश द्वार जो बड़े दरवाजे है वह दो है जो कि एक पश्चिम दिशा की ओर तथा दूसरा दक्षिण दिशा की ओर है यह दोनों दरवाजे में से अभी पश्चिम दिशा की ओर दरवाजा पर्यटक के लिए खुला है व  दक्षिणी दरवाजा आपात कालविशेष लोग (शाहीपरिवार के लोगों) के लिए है

पश्चिमी दरवाजा
पश्चिमी गेट

                                                              


दक्षिणी व उत्तरी गेट
                                                               दक्षिणी व उत्तरी गेट

चारबाग उद्यान 

जब हुमायूं के मकबरे में प्रवेश के लिए पश्चिमी दिशा वाले गेट में प्रवेश करने के बाद आपको हुमायूं का मकबरा को घेरे हुए 30 एकड़ में फैले चारबाग शैली के उद्यान से निखरती हुई है। यह उद्यान  चारदीवारी के भीतर बना है। यह उद्यान चार भागों में  पैदल पथों और दो विभाजक  केंद्रीय जल नालिकाओं  द्वारा बंटा हुआ है। यह इस्लाम के जन्नत के बाग में बहने वाली 4 नदियों के परिचालक है इस प्रकार से चार बागों में फिर से पत्थर के बने रास्तों द्वारा छोटे‌ छोटे भागों में विभाजित किया गया है, इस प्रकार कुल मिलाकर 36 भाग बनते हैं केंद्रीय जल नाली का मुख्य द्वार से मकबरे तक जाती हुई उसके नीचे जाती और दूसरी और फिर से निकलती हुई प्रतीत होती है। तथा तीसरी तरफ से यमुना नदी मे जाती होगी जो समय के साथ यमुना नदी दूर हो गई।
केंद्रिय नलिका व चार बाग
 
                                                           केंद्रिय नलिका व चार बाग

बाहरी बनावट

विशाल इमारत में प्रवेश के लिए दो 16 मीटर ऊंचे दुमंजिले( दूसरी मंजिल)में प्रवेश द्वार पश्चिम और दक्षिण में बने हैं। इन दोनों में  मुख्य इमारत के ईवान( किसी मेहराबी  छत वाले हाॅल या दालान को कहते जिसकी एक तरफ पूरी तरह खुली होती है तथा अन्य तीन ओर दीवारें हो सकती है) पर बने सितारे के समान ही एक 6 किनारों वाला सितारा मुख्य प्रवेश द्वार की शोभा बढ़ाता है। मकबरे का निर्माण मूल रूप से पत्थरों को गारे-चूने से जोड़कर किया गया है और लाल बलुआ पत्थर से ढका हुआ है। इसके ऊपर पच्चीकारी, फर्श  की सतह, झरोखा की जालियों, द्वार चौखटो और  छज्जो  के लिए सफेद संगमरमर  का प्रयोग किया गया है। मकबरे का विशाल गुंबद भी सफेद संगमरमर से ढका है। 

हुमायूं के मकबरे में मुख्य द्वार से प्रवेश करने के बाद हुमायूं का 2 मंजिला स्मारक वाला मकबरा अष्टकोणीय (8 भुजा) वाला मकबरा में प्रवेश करते समय आपको चारों दिशाओं में एक समान दिखाई देगा तथा इसके  चारों तरफ पहली मंजिल में प्रवेश करने के लिए प्रवेश द्वार जोकि कुछ सीढ़ियां से है।  और यह मकबरा 7 मीटर ऊंचे मूल चबूतरे पर खड़ा है 12000 वर्ग मीटर की ऊपरी सतह को लाल जालीदार मंडेरे घेरे हुए है। इस वर्ग का चबूतरे के कोनों को छांटकर अष्टकोणीय रूप दिया गया है। इस चबूतरे की पहले मंजिल में 16 कोठरियां बनी हुई है, जिनमें 100 से अधिक कब्रे बनाई हुई है। इसका  निर्माण  सीढियों  के ऊंचे चबूतरे पर खड़ा किया गया है।


ताजमहल से पहले निर्मित यह मकबरा 12000 वर्ग मीटर के चबूतरे पर है व इसकी ऊंचाई 47 मीटर और 300 फीट चौड़ा है। इमारत पर फारसी बल्बुअस गुंबद बना है। यह गुंबद 42.5 मीटर ऊंचे गर्दन रूपी बेलन पर बना है। गुंबद के ऊपर 6 मीटर ऊंचा पीतल का कलश स्थापित है और उसके ऊपर चंद्रमा लगा हुआ है। गुंबद दोहरी परत में बना है, बाहरी परत के बाहर सफेद संगमरमर का आवरण लगा है और अंदरूनी परत गुफा रूपी बनी है। गुंबद के शुद्ध और निर्मल सफेद रूप से अलग शेष इमारत लाल बलुआ पत्थर की बनी है।

बाहरी बनावट

          मकबरे की बाहरी बनावट


बाहरी बनावट



किले की आंतरिक बनावट

इस किले में मुख्य केंद्रीय कक्ष सहित नौ वर्गाकार कक्ष बने हैं। इनमें बीच में बने मुख्य कक्ष को घेरे हुए शेष 8 दुमंजिला  कक्ष बीच में खुलते है। यह इमारत की मुख्य कब्र है इसका प्रवेश दक्षिणी और एक ईवान से होता है तथा अन्य दिशाओं के ईवानो में  सफेद संगमरमर की जाली लगी है।मुख्य कक्ष गुंबददार दोगुनी ऊंचाई का एक मंजिला है और इसमें गुंबद के नीचे एकदम मध्य में आठ किनारे वाले एक जालीदार घेरे में  मुगल सम्राट हुमायूँ  दिखावटी सुंदर प्रतिकृति की कब्र बनी  हुई है और सम्राट की असली समाधि ठीक इसी के नीचे वाले कक्ष में बनी हैं, जिसका रास्ता बाहर से जाता है लेकिन नीचे तक आम पर्यटकों को पहुंचने नहीं दिया जाता है।

मुख्य कक्ष में संगमरमर की जालीदार घेरे के ठीक ऊपर मेहराब भी बना है जो पश्चिम में मक्का की और बना है यहां आमतौर पर प्रवेश द्वारों पर खुदे कुरान के सूरा 24( कुरान का 24 वा अध्याय) के बजाय सूरा-अन-नूर की एक रेखा बनी है जिसके द्वारा प्रकाश किबला (मक्का की दिशा) से अंदर प्रवेश करता है।

मुख्य कक्ष के चार कोणो पर चार अष्टकोणीय  कमरे हैं जो मेहराबदार  से जुड़े हैं। मुख्य कक्ष की भुजाओं के बीच बीच में चार अन्य कक्ष भी बने हैं।ये  आठ कमरे मुख्य कब्र की परिक्रमा बनाते हैं। प्रत्येक कमरों के साथ - साथ कमरे और बने हैं जो कि कुल मिलाकर 124 कक्षीय योजना का अंग है। इन छोटे कमरों में कई मुगल नवाब और दरबारियों की कब्रो को समय-समय पर बनाया हुआ है इनमें से प्रमुख हमीदा बानो बेगम और दारा शिकोह की कब्रे। प्रथम तल को मिलाकर इस मुख्य इमारत में लगभग 100 से अधिक खबरें बनिया जिनमें से अधिकांश पर मुगल सम्राट के राज परिवार या दरबारियों में से ही है।

भारतीय वस्तु कला में फारसी प्रभाव का यह सबसे पहला उदाहरण है और इसमें भारतीय स्थापत्य कला के घटक देखने को भी मिलते हैं जैसे गुंबद को घेरे हुए राजस्थानी स्थापत्य  कला के छोटे क्षत्रिय जो मूल रुप से नीली टाइल से ढकी हुई है

हुमायू की कब्र व प्रवेश  गेट

                                   प्रवेश गेट (मेहराबदार)


                 हुमायू की कब्र



हमीदा बानो बेगम, दारा शिकोह व अन्य की कब्रे



 
                     आंतरित बनावट(गोल सितारा)



 आंतरित बनावट(जालिदार व मेहराबदार)

हुमायूं के मकबरे के अलावा इस किले में अन्य मकबरे भी है


1. ईसा खां का मकबरा

ईसा खां का मकबरा हुमायूं के मकबरे से 20 वर्ष पूर्व का है जोकि सन् 1547-48 के आसपास बना है। इस मकबरे को ईसा खां के जीवनकाल में ही बनाया गया था। यह मकबरा हुमायूं के मकबरे के पश्चिमी दरवाजे से पहले मुख्य रास्ते पर दाएं हिस्से में बना है। ऐसा कहा जाता है बीसवीं शताब्दी के आरंभ काल तक इस किले के आसपास एक पूरा गांव बसा रहता था।


प्रवेश द्वार

प्रवेश द्वार


                                      प्रवेश गेट के पास लाल बलुआ पत्थर पर लेख


i)  ईसा खां कौन था

ईशा खान का पूरा नाम ईशा खान नियाजी था इनका जन्म लगभग सन् 1453 ईसवी में दिल्ली में हुआ था। वह मूल रूप से वह पुश्तून थे जोकि मुगल वंश के विरुद्ध लड़ने वाले शूर वंश के शासक शेरशाह सूरी के दरबार का एक अफगान नवाब (सभापति) था। शेरशाह के बाद उनके बेटे इस्लाम  सूरी के दरबार में भी आमिर के पद पर रहते हुए कई लड़ाई में  सूरी वंश का साथ दिया। सूरी वशं में आपसी विद्रोह के चलते व मुगलों के आक्रमण के कारण सूरी वशं खत्म हो गया तथा साथ में लगभग सन् 1548 में ईसा खां  की मृत्यु हो गई।

ii) मकबरे का रंग रूप व आकार

ईसा खां  का मकबरा चार दीवारों के अंदर बना हुआ है जोकि बलुआ पत्थर से बनाई गई है मकबरे में जाने के लिए चार दीवार के अंदर एक छोटा सा प्रवेशद्वार एक फीट ऊंचाई पर है हैं। इसके बाद आपको ईशा खान का मकबरा मिलेगा जो की अष्टकोणीय आकार में बना है। इस मकबरे का निर्माण  लाल बलुआ पत्थर, नीली छतरीयो, चमकदार टाइलोजालीदार जालियों से किया गया है।  इस मकबरे को भी एक फीट ऊंचे मंच पर बनाया गया है। इसके चारों ओर एक बरामदा है जिसकी छत पत्थर के खंभों पर हैं।इस मकबरे के आसपास  हरे-भरे बगीचे  हैं। 


                            ईसा खान का मकबरा

ईशा खा की कब्र

मकबरा व प्रवेश गेट



iii) मस्जिद

ईशा खान के मकबरे में एक मस्जिद भी है जो कि मकबरे के पूर्व हिस्से में है यह मस्जिद तीन आंगन चौडी लाल बलुआ पत्थर से बनी है यह भी 1 फीट ऊंचे मंच पर है इसका आंतरिक भाग समतल है इस मस्जिद पर ऊपरी हिस्सा नीली छतरियों से बना है।  इसका आगे हिस्सा का मेहराबदार है। दोनों कक्ष के बीच में गुंबद बना हुआ है।

यह मकबरा और मस्जिद ईशा खां के जीवन काल में ही बना था और यह 20 वी शताब्दी  तक मिट्टी में दब चुका था।
मस्जिद

मस्जिद

2. बू हलीमा का मकबरा और बाग

हुमायूं के मकबरे में मुख्य चार दीवारों के बाहर स्थित अन्य स्मारकों में प्रमुख है बू हलीमा का मकबरा और उसके बाग है। यह मकबरा हुमायूं के मकबरे में प्रवेश करने का जो मुख्य मार्ग है ( जब टिकट लेने के बाद प्रवेश करते हैं) उसमें  सबसे पहला मकबरा है जो कि मुख्य प्रवेश के बाएं हिस्से में है। यह अब पूरी तरह से खंजर हो चुका है।

i) बू हलीमा कौन थे

इसके बारे में अधिक जानकारी तो नहीं है लेकिन कहते हैं कि यह हुमायूं के पिता  बाबर के दल का एक हिस्सा थी जो कि बाद में हुमायूं के हरम में एक गीली नर्स व मुगल कुलीन महिला थी जो कि बाद में हरम के एक महत्व स्थान पर कब्जा कर लिया था।

ii) मकबरे का रंग रूप व आकार

बू हलीमा मकबरा आकार में आयताकार है जो की चमकीली पत्थरों से बनाया गया है मकबरे में चारों भुजाओं में से प्रत्येक में दो प्रवेश द्वार  (जो कि मेहराबदार) में कक्ष है जो छोटे आयताकार बुर्ज हैं  प्रवेश द्वार के दोनों ओर तक जाने वाली छोटी सीढिया है इन मकबरे पर नीले हरे और पीले रंग की टाइलें है। इस मकबरे में दोनों कक्ष के बीच  में एक सीढियों है जो शीर्ष  तक जाती है इस सीढियों  से  जैसे ही आप शीर्ष  पर पहुंचेंगे तो आपको अष्टकोणीय  मंच मिलेगा, कहते है कि इस मंच के केंद्र में बू हलीमा की कब्र है जो कि दफन है।

इस मकबरे के चारों और आसपास में हरा भरा बगीचा है हालांकि मकबरा बगीचे के केंद्र में नहीं है जैसा कि उस अवधि के दौरान अन्य मकबरे में होते थे।

                        हरा भरा बाग

बू हलीमा मकबरा

                     बू हलीमा मकबरा 


iii) बू हलीमा गेट

हुमायूं के मकबरे के पश्चिम प्रवेश द्वार से आगे और मुख्य द्वार के रास्ते में मुख्य प्रवेश के बाद पहला प्रवेश द्वार बू हलीमा गेट का है जो कि 16 वीं शताब्दी में बगीचे की पश्चिमी दीवार के कुछ हिस्से को तोड़कर सफेद  व लाल पत्थरों से प्रवेश द्वार बनाया गया है।

बू हलीमा गेट
                       बू हलीमा गेट


 यह विशाल दरवाजा बू हलीमा के मकबरे बगीचे तक जाता है जो कि रास्ते का अग्रभाग कतलधार है और टाइल कार्य के अवशेष अभी भी देखे जा सकते हैं बगीचे की दीवार के दो उतरी बुर्ज गुंबदी  छतरियो से सुसज्जित है। यह लगभग 16 मीटर ऊंचा है जो कि हुमायूं के पश्चिमी दरवाजे के समान हैं यह दरवाजा दो मंजिला है। और इसके दूसरी मंजिल पर दोनों इसमें एक गेलरी  (कक्ष) है।

3.अरब सराय मकबरा

ईशा खा मकबरा , बू हलीमा मकबरे व बू हलीमा गेट के बाद अरब सराय का प्रवेश द्वार निवास स्थल आता है जोकि हमीदा बेगम द्वारा हुमायूँ  मकबरे में कार्यरत मजदूरों/कारीगरो के रहने के लिए बनाया गया था।

i) अरब सराय गेट

बू हलीमा गेट के प्रवेश के बाद दाएं हिस्से में उत्तरी दरवाजा है जो अरब सराय के प्रवेश द्वार के लिए है यह दरवाजा 14 मीटर ऊंचा है जोकि फारसी शिल्पकारो के निवास हेतु बनाए गए प्राचीन अहाते (कक्ष) की ओर जाता है

बू हलीमा गेट

अरब सराय गेट का लाल बलुआ पत्थर पर लेख

इस गेट का निर्माण लाल पत्थर सफेद संगमरमर से किया गया  आंतरिक कार्य इस दरवाजे को आकर्षक रूप प्रदान करता है इस गेट का आकार अन्य गेट की तरह मेहराबदार है व  इस गेट के दोनों और छोटे कक्ष । इस गेट पर 3 सितारे भी बने हुये है। प्रक्षेपी, झरोखों में अभी भी चमकदार मृत्तिका  टाइलो के अवशेष हैं।

ii) कारीगर

हुमायूं मकबरे के निर्माण के लिए हमीदा बेगम द्वारा बुलाए गए अफगानिस्तान से मिराक घुइयाथुद्दीन  उसके पुत्र सैयद मुबारक मिराक घुइयाथुद्दीन और इनके साथ अन्य कार्यक्रमों के रहने के लिए अरब सराय स्थल का निर्माण किया गया था। अब यह  स्थान खंडहर (उजड़ा) सा हो गया है।

iii) रंग रूप व आकार

यह मकबरा आयताकार रूप में है इस मकबरे में एक प्रवेश द्वार है उसी  द्वार के पीछे दोनों तरफ 2-2 कक्ष बने हैं जो मेहराबदार  आकृति में हैं। इन कक्ष को लाल, कालेसफेद बलुआ पत्थर से बनाया गया है। इन कक्ष के सामने लगभग 3 फीट ऊंचा मचं खड़ा है और इस मंच के आसपास हरा भरा बाग है।

             अरब सराय मकबरा

            अरब सराय के सामने मंच

4. अफसर वाला गुम्बद व मस्जिद

ईशा खान, बू हलीमा व अरब सराय मकबरे के बाद हुमायूं मकबरे के परिसर अफसर वाला गुम्बद व मस्जिद आती है यह मकबरा हुमायूं के पश्चिम में प्रवेश द्वार से दाएं हिस्से में चार दीवारों में बना है

i) अफसर वाला मकबरा की पहचान

अफसर वाला मकबरा नाम का शब्द फारसी शब्द से लिया गया है जो कि अपने आप में  अंग्रेजी शब्द से निकला है इसका मतलब है कि यह अफसर वाला भवन  था। जो कि हुमायूं के काल में एक अधिकारी बनने वाला सैनिक कमांडर था लेकिन यह ज्ञात नहीं हो सका कि वह अधिकारी कौन था। लेकिन ऐसा कहा जाता है कि जब हुमायूं भारत में दोबारा आया तो उनके साथ चार अफसर (अधिकारी) आए जो बाद में तीन अधिकारी लौट कर चले गए और आखिरी चौथा अफसर हुमायूं के साथ रह गया इस अधिकारी ने हुमायूं के लिए युद्ध में काफी मदद की थी।

ii) इस मकबरे का रंग रूप व आकार

अफसरनामा मकबरा का आकार अष्टकोणीय  है तथा इसके आगे का हिस्सा मेहराबदार है। मकबरे के मुख्य हिस्से पर दोनों तरफ छोटे-छोटे दो मेहराबदार खाने बने हैं। मुख्य मेहराबदार  के ऊपर दो सितारे बने हुए हैं। यह लगभग 3 फुट ऊंचे चबूतरे पर बनाया गया है। इसको लाल  पत्थर से ढका गया है और इसमें सफेद व काले बलुआ  पत्थर का  प्रयोग किया है मकबरे के ऊपर शीर्ष  में गोल आकृति में छतरियां बनाई गई है।

अफसर वाला गुम्ब्द 

                                   अफसर वाला गुम्बद   व लाल बलुआ पत्थर पर लेख


iii) मस्जिद

अफसरनामा मकबरे के साथ ही एक तीन कक्ष वाली मस्जिद है जो कि इसी के साथ बनाई गई थी। यह मस्जिद भी ऊचे चबूतरे पर बनाई गई है इस मस्जिद का निर्माण लाल काले और सफेद बलुआ पत्थर से किया गया है इसके तीनों कक्ष  मेहराबदार है तथा बीच वाले कक्ष के ऊपर छतरिया बनाई गई है जैसा बाकी मस्जिद में  होता है। मस्जिद के मध्यवर्ती ऊंची मेहराबदार के ऊपर ओला है इस संभवत कभी उत्तीर्ण लेख था।

अफसरवाली  मस्जिद 
                                                            मस्जिद के अंदर

4. नाई का मकबरा

हुमायूं मकबरे के पास व हुमायूँ  के दक्षिणी  दरवाजे के समीप नाई का मकबरा है। 

i) नाई का मकबरा किसके लिए था

यह मकबरा मुगल परिवार के किसी शाही परिवार के नाई  की कब्र है जिसमें किसी एक महिला व पुरुष की कब्र है। हालांकि यह नहीं कह सकते कि  इस मकबरे में किसकी कब्र है क्योंकि इस मकबरे में किसी का नाम नहीं लिखा है।

                                                   नाई के मकबरा का लाल बलुआ पत्थर पर लेख
                    

iii) इस मकबरे का रंग रूप व आकार 

यह मकबरा अष्टकोण आकार में हैं। यह मकबरा लगभग 3 फुट ऊंचे चबूतरे पर खड़ा है जिस पर सीढियों से जाया जाता है व इसका  प्रवेश द्वार मेहराबदार आकृति में है। इस प्रवेश द्वार के दोनों तरफ 2-2  छोटी मेहराबदार  बनाई गई  है। इस मकबरे के ऊपर एक गोल आकृति में छतरी बनी हुई है। इस छतरी के दोनों तरफ दो गुंबद बनाए गए हैं जो नीले रंग में है।

नाई का मकबरा

नाई का मकबरा



कब्र व अंदर का डिजाईन

इस मकबरे की लोकप्रियता अग्रभाग पर लाल पत्थर का प्रयोग करके छत पर टाइलों से सजाकर छतरियों, लाल पत्थर की जालियों से इस मकबरे को आकर्षक रूप दिया गया है। इस मकबरे के इर्द-गिर्द जलमार्ग 1905-09 में बनाए गए हैं।


5. नीला गुंबद वाला मकबरा

यह मकबरा हुमायूं मकबरे के परिसर से बाहर पीछे की तरफ है निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से आसानी से देखा जा सकता क्योंकि उसके सटीक है इस मकबरे को बीसवीं शताब्दी में लगभग 1980 के दशक में हुमायूं के मकबरे के साथ जोड़ा गया है कहते हैं कि इसको जहांगीर  के समयकाल में बनाया गया है। लेकिन अभी तक असमंजस में है कि इस मकबरे को किसके लिए और कब बनाया गया था।

i) मकबरा

नीला गुंबद वाला मकबरा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यह मकबरा हुमायूं के मकबरे से पहले था लेकिन कुछ का कहना यह भी है कि यह मकबरा जहांगीर के समय में बनवाया गया था जो कि सम्राट अकबर के दरबारी बेरम खा के पुत्र अब्दुल द्वारा अपने सेवक मियां फहिम  के लिए बनवाया गया था। मियां फहीम इनके बेटे फिरोज खान के साथ ही पले बढ़े हुए थे और सन 1525-26 में जहांगीर के समय में मुगल सेनापति महाबत खा के विद्रोह में लड़ते हुए काम आये थे।

ii) इस मकबरे का रंग रूप व आकार 

यह मकबरा लगभग 3 फुट ऊंचे चबूतरे पर खड़ा है और यह मकबरा अष्टकोण स्वरुप में है अंदर से वर्गाकार है। इसको आंतरिक रुप से दो मंजिला में विभाजित किया गया है। इस गोलाकार मकबरा में चारों तरफ  मेहराबदारजाली बनाई हुई है इसकी छत गोलाकार है इसकी ऊपर नीले रंग में छतरिया  बनी हुई है। मकबरे का काले, लालसफेद बलुआ पत्थर से निर्माण किया गया है।                             

नीला गोल गुम्बद



  नीला गोल गुम्बद व इसके अंदर



इसके अंदर गर्दनदार गुंबदप्लास्टर से बहुत ही सुंदर चित्रकारी की गई है

नोट: इस मकबरे की भव्यता अपने समय काफी शानदार थी लेकिन समय समय के साथ इसकी व्यवस्था बिगड़ती गई और 19वीं शताब्दी में इसके कुछ हिस्से को रेलवे लाइनों ने अपने कब्जे में ले लिया हालांकि 1980 के दशक में मकबरे के परिसर से गुंबद को विभाजित कर सड़क का निर्माण किया गया और इसके आसपास 200 से अधिक बस्ती का कब्जा हो गया था 2005-06 में इन अवैध बस्ती को स्थानांतरित किया गया 2014 में हुमायू के परिसर से स्मारक को विभाजित करने वाली सड़क को स्थापित करने के लिए रेलवे के साथ समझौता किया गया फिर इसके आसपास को अच्छा बनाने के लिए कार्य किया गया तब जाकर इसका पुन निर्माण किया जा सका

6. 3 छोटे गेट वाला एक बड़ा कक्ष

हुमायूं मकबरे के पीछे  ही पूर्व हिस्से में 3 छोटे गेट वाला एक बड़ा कक्ष है इनके दरवाजे लकड़ी के हैं। इसको  लाल, काले बलुआ पत्थर से बनाया गया है तथा  इसके ऊपर सफेदी पलास्टर किया गया है। जो दिखने में दो मंजिला है व दूसरी मंजिल के ऊपर छोटे-छोटे फूल की आकृति में डिजाइन बनाए गए हैं। इसको 1 फुट ऊंचे चबूतरे पर बनाया गया है इसके आगे एक नाली भी बनी हुई है जो हुमायूं के मकबरे तक जल मार्ग है। इस पर कोई नाम ना लिखा होने के कारण यह कह नहीं सकते किसके लिए बनाया गया है।




7. मेहराब दार कक्ष/ दरवाजा

हुमायूं मकबरे के चार दीवारों पर व मकबरे के उत्तरी दिशा में वर्गाकार मेहराबदार आकृति में एक कक्ष या गेट खड़ा है जो कि लगभग 3 फुट ऊंचे वर्गाकार चबूतरे पर बनाया गया है। इसे 3 फुट ऊंचे   चबूतरे पर 10 मेहराबदार आकृति बनाई गई है उनके बीच एक नलीका बनाई गई है जो हुमायूं मकबरे के पास जाती है। इसको लालसफेद बलुआ पत्थर से बनाया गया है। मेहराबदार के दोनों साइड दो दो छोटे मेहराबदार बनाए गए हैं। इस के ऊपरी हिस्से में छोटी-छोटी फूल के डिजाइन बॉर्डर बनाए गए हैं जोकि लाल बलुआ पत्थर से है इस मेहराबदार कक्ष के ऊपर एक जालीदार मेहराबदार बनाई गई है।

मेहराबदार



इस पूरे हुमायूं मकबरे सहित अन्य मकबरे का 16 वी शताब्दी से स्वतंत्रता तक का स्वरूप

जब इस मकबरे का निर्माण किया गया और बनकर तैयार हो गया तब यह मकबरा और अन्य मकबरे अपने आप में बहुत ही सुंदर स्वरूप में दिखते थे लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया वैसे वैसे इन मकबरा का स्वरूप  बिगड़ता गया क्योंकि मुगलों ने अपनी राजधानी दिल्ली से आगरा हस्तांतरित किया। यहां तक कि 17 शताब्दी तक स्थानीय लोगों ने चार बागो में सब्जी तक  उगाना शुरू कर दिया और इनमें चार केंद्रीय  सरोवर गोल चक्र में बदलते गए क्योंकि वहां पर पेड़ उगने लगे। लेकिन जब 20 वीं शताब्दी में लॉर्ड कर्जन जब भारत के वायसराय बने तब इन्होंने इसे वापस सुधारा और सन् 1906-09 एक बडा उद्यान लगाया व जल नालिका  में भी बलुआ पत्थर लगाये गये व 1915 में पौधारोपण योजना के तहत केंद्रीय वृक्षारोपण हुआ और अन्य स्थानों पर पौधे लगाए गए।

सन् 1947 में जब भारत आजाद हुआ के समय पुराना किला शरणार्थियों के लिए शरणार्थी कैंप में बदल गया था और जगह-जगह यहां पर लोग रहने लगे थे जिससे इस किले में काफी कुछ उजड़ गया।उसके कुछ वर्षों बाद भारत सरकार ने इसको अपने नियंत्रण में लेकर इसको भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग को दे दिया लेकिन इसके द्वारा भी इसका इतना संरक्षण नहीं किया गया और धीरे-धीरे 1980 तक यहां पर बस्ती बसने लग गई जिससे इस मकबरे की हिस्से की जमीन को काफी अधिग्रहण कर लिया गया इस मकबरे के पास बस्ती बसने के कारण मकबरे को काफी क्षति हुई और इसके आसपास के मकबरे, किले व  धार्मिक स्थल तक जो कि  दरगाह हजरत निजामुद्दीन का भी बुरा हाल था वहां का पवित्र कुंड एक गंदे नाले में बदल गया था। पुन: उद्धार कार्य प्रारंभ होने से पहले  अत्याधिक अतिक्रमण की यहां आम बात थी


भारत के स्वतंत्रता के बाद इस मकबरे का स्वरूप

भारत की स्वतंत्रता के बाद इसको भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को सौंपने के बाद इस विभाग ने सन 1997 में आगा खान ट्रस्ट के साथ साझेदारी में एक संरक्षण परियोजना पर ध्यान केंद्रित किया गया जिसमें पहले चरण  (1997- 2003) मे बहते पानी के साथ केंद्रीय नलिकाओ के साथ बगीचे, कब्र, और अन्य संरक्षण पर काम किया गया। यह कार्य स्मारक के इर्द-गिर्द 30 एकड़ बगीचे का पुनरुद्धार किया अन्य संरक्षण कार्यो में 3 किलोमीटर जल मार्गो की मरम्मत की गई 3.5 किलोमीटर रास्ते के किनारे का पुनः स्थापित किया गया 3000 तक अतिरिक्त मुख्य  रास्ते से मिट्टी को हटवाया गया हस्त छेनी  से काटा गया, मुगल की पसंद वाले 2500 पौधे लगाए गए। 25000 वर्ग मीटर रास्ते की मरम्मत की गई । बारिश  के जल को एकत्रित करने की प्रणाली शुरुआत की गई ।छोटी संरचनाओं को संरक्षित किया गया ।ऐतिहासिक कुओं  को खोजा गया तथा उनको साफ किया गया।यह कार्य 2007 तक चला जिसमें  इसे काफी बदलाव किया गया

आगा खां ट्रस्ट फॉर कल्चर ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के सहयोग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की भागीदारी से वर्ष 2007-13 के दौरान हुमायूं के मकबरे और उससे जुड़े स्मारकों का संरक्षण कार्य किया। इसमें भी कई कार्य किए गए जिसमें हुमायूं के मकबरे और उससे जुड़े अन्य मकबरे की सजावट और उनको पुन: पहले जैसा सुंदर बनाने के लिए प्रयास किए गए। इसी चरण में ही  5 अगस्त 2011 को आगाखान ट्रस्ट द्वारा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ मिलकर ईशा खान मकबरे का भी पुनरुद्धार किया गया जिसमें मिट्टी में दबे मकबरे के चारों ओर मिट्टी को निकालकर लाल बलुआ पत्थर से तथा अन्य पत्थरों से इसके आसपास हरा भरा बाग़ बनाकर इस मकबरे को पुनः पहले जैसे स्थापित किया गया।

विश्व धरोहर स्थल

ऐसा कोई भी स्मारक या प्राकृतिक स्थल जो मानवता के लाभार्थियों के लिये संरक्षण के योग्य समझा गया हो को
यूनेस्को द्वारा  विश्व धरोहर सूची में नामांकन उसके विशिष्ट सार्वभौमिक महत्व  की पुष्टि करता है।



हुमायूँ  के मकबरे के साथ अन्य मकबरों को सन 1993 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।

हुमायूं मकबरे व अन्य मकबरे की कुछ महत्वपूर्ण बिंदु और रोचक तथ्य

मुगल वास्तु कला से प्रेरित ऐतिहासिक मकबरा व अन्य मकबरो की कुछ रोचक घटक  व महत्वपूर्ण बिंदु है जो इस मकबरे को मुगल काल का प्राथमिक कला व ऐतिहासिक मकबरा कहते हैं।

  1.  दुनिया का सातवां अजूबा जो ताजमहल है वह इसी के तर्ज पर अथार्त इसी के आकृति स्वरूप में बनाया गया था।
  2. हुमायूँ का मकबरा ऐसा मकबरा है जो एक पत्नी का अपने पति के प्यार की निशानी के लिए है।
  3. हुमायूं के मकबरे मे  दूसरी मंजिल पर दिखाने की लिये दिखावटी सुंदर प्रतिकृति कब्र बनाई गई है व नीचे उनकी असली कब्र है।
  4. हुमायूं के मकबरे में 100 राजशाही परिवार की कब्र है जिसमें से हुमायूं व  उनकी बेगम हमीदा बेगम और दारा शिकोह की कब्र है।
  5. यह मकबरा ऐसा मकबरा है जिसमें लाल पत्थर का पहली बार बहुत अधिक प्रयोग किया गया है और पहली वस्तुकला है जिसमें फारसी और भारतीय कला भी शामिल है।
  6. इस मकबरे के चारों ओर नलीकाय व चार बाग है जो इसकी शोभा बढ़ाता है।
  7. इस मकबरे के चारों ओर 30 एकड़ में फैली चारबाग शैली उद्यान है जो इसमें खूबसूरती का स्वरूप प्रदान करता है। और यह भारत में इससे पूर्व कभी नहीं देखा होगा।
  8. मकबरे के निर्माण के कुछ वर्षों तक इस मकबरे के परिसर में कब्रे  के ऊपर एक शुद्ध सफेद शामियाना लगा होता था।और उनके सामने ही पवित्र ग्रंथ रखे रहते थे इसके साथ ही हुमायूँ  की पगड़ी, तलवार और जूते भी रखे रहते थे।
  9. इस मकबरे को यमुना नदी के किनारे हजरत निजामुद्दीन दरगाह के कारण उनकी हमीदा बेगम ने चुना है।
  10. इस मकबरे के प्रवेश के लिए दो बड़े दरवाजे है जो एक पश्चिम की तरफ वह दूसरा उत्तर की तरफ या दक्षिणी है। उत्तर की तरफ दरवाजा आपातकालविशेष लोगों के लिए खुला है।
  11. हुमायूं मकबरे के निर्माण के लिए अफगानिस्तान से कलाकार/ कारीगर बुलाए गए थे।
  12. यही वह मकबरा है जब 1857 के विद्रोह के कारण बहादुर शाह जफर-ii  ने तीन अन्य राजकुमारों सहित यहां पर शरण ली थी और बाद में ब्रिटिश सेना के   कप्तान हाॅडसन ने यहीं से गिरफ्तार किया था।
  13. गुलाम वंश के शासन में यह जगह किलोकरी किले में स्थित थी जो नसरुद्दीन के पुत्र तत्कालीन सुल्तान केकुबाद  की राजधानी हुआ करती थी।
  14. वर्तमान में हुमायूं का मकबरे ऐसा मकबरा है जिसमें हुमायूं मकबरे के साथ अन्य मकबरे भी है इसमें प्रसिद्ध मकबरा ईशा खान, नाई का मकबरा, अफसरनामा मकबरा, नीला गोल गुंबद है।
  15. ईशा खान के मकबरे को स्वर्ग  का  मकबरा  भी कहा जाता है
  16. ईशा खान का मकबरा पहला मकबरा था जो मिट्टी में में दबा हुआ था।
  17. ईशा खान के मकबरे के आसपास पहले बस्ती भी होती थी जो कि गांव के रूप में बसी हुई थी।
  18. इस मकबरे का पुनरुद्धार कार्य संपन्न होने के बाद डॉ मनमोहन सिंह द्वारा 18 सितंबर 2013 में आशा खाँ ट्रस्ट की उपस्थिति में उद्घाटन किया गया।

इस मकबरे के आसपास अन्य मकबरे घूमने के स्थल

1. हजरत निजामुद्दीन की दरगाह: इस मकबरे के थोड़ी ही दूर हजरत निजामुद्दीन की दरगाह है जो इस्लाम धर्म के गुरु व खुदा का दर्जा दिया गया है उनकी कब्र है।(हजरत निजामुद्दीन की दरगाह )

2. सुंदर नर्सरी: अंग्रेजों के शासन काल 1913 में आप एक सुंदर नर्सरी बनाई गई जो कि विभिन्न वस्तु कला और विभिन्न प्रकार के फूल को यहां पर प्रदर्शित करती है यह प्राचीन काल के इतिहास को दर्शाता है लेकिन इसका संरक्षण जब उसको दोबारा से निर्मित बीसवीं शताब्दी के शुरुआत में किया तब किया गया।

3. दिल्ली का पुराना किला: इस मकबरे के थोड़ी ही दूर दिल्ली का पुराना किला या जो हुमायूं और शेर शाह सूरी के द्वारा निर्मित किया गया है।( दिल्ली का पुराना किला)

4. सराय काले खां: निजामुद्दीन के आसपास सराय काले खां जोकि 1710 के बाद स्थापित हुआ और यह भी निजामुद्दीन बस्ती के साथ ऑफिस में यहां आया यहां पर एक अंतरराष्ट्रीय बस अड्डा विजय सराय काले खां बस अड्डे के नाम से विख्यात है इसी के आसपास अरब सराय बस्ती भी है।

5. इंद्रप्रस्थ पार्क: इस मकबरे के पीछे ही इंद्रप्रस्थ पार्क है जो महाभारत किस समय कहने वाली जगह के नाम से जाना जाता है यहां पर एक जैन मंदिर है उसके पास हरियाली पार्क है

6. 7 Adventure Park: इसी के पास पीछे की ओर सराय काले खां में सेवन एडवेंचर पार्क है जो विश्व के विख्यात अजूबे को इस में दर्शाया गया है उसमें उनके डुप्लीकेट बनाकर दर्शाया गया है

इस मकबरे का देखने का समय

हुमायूं के मकबरे का देखने का समय सुबह 9:00 बजे से रात्रि 9:00 बजे तक है। यह हुमायू मकबरा पूरे सातों दिन खुला रहता है।

इस मकबरे के लिए टिकट की कीमत






हुमायूं के मकबरे के लिए भारतीय नागरिक को ₹35  विदेशी नागरिक को ₹550 देने होते हैं और सार्क देशों के नागरिक को भी ₹35 देने होते हैं बच्चों के लिए यहां पर निशुल्क होता है


इस मकबरे के पास यातायात

आप इस स्थान पर रेल, बस, हवाई जहाज, मेट्रो रेल, ऑटो रिक्शा या  अपने यातायात साधन से आ सकते हैं
1- यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन निजामुद्दीन है जो कि भारत के विभिन्न जगह से रेल आती है इस रेलवे स्टेशन से ऑटो रिक्शा करके यहां पर आया जा सकता है।
2- इस मकबरे के पास ही बस स्टैंड है जो अलग-अलग जगह से आती है यहाँ का बस स्टॉप निजामुद्दीन का होता है।
3- यहां पर आप दिल्ली मेट्रो से भी आ सकते हैं यहाँ का मेट्रो स्टेशन निजामुद्दीन का है।
4 यहाँ  का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है।




मकबरे की कुछ  अन्य फोटो

                                                        1. मकबरे मे प्रवेश द्वार सीढी व चबूतरा 
                                                    




                                                           2. मकबरे से पश्चिमी द्वार व चार बाग  

3. हुमायू के पहली मंजिल प बाहरी बनावट



                                                             4.  बू हलीमा गेट के अंदर 


                                               5. हुमायू मकबरे के चार दिवारी के छोटे मेहराबदार

                                            


                                                6. चार बाग परिसर मे कब्र


7.  मकबरे मे प्रत्येक कमरे मे 2 या 3 कब्र

8. उत्तर दिशा से मकबरा

9. 
हुमायू मकबरे का  लाल बलुआ पत्थर मे लेख

10. आगा खा ट्र्स्ट की परिसर योजना

 
10.  आगा खा ट्र्स्ट की 2007 योजना

11. ईशा खा मकबरे का लेख 

12. 
ईशा खा मकबरे का कार्य सम्पन्न

12. प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा उद्घाटन



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